अंतिम अद्यतन : 10/12/2019
राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान
कला इतिहास, संरक्षण एवं संग्रहालय विज्ञान
(विश्वविद्यालयवत्)
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
 
 
 
 

 

 
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दिसम्बर, 2019

सांझी : वृन्दावन की पारम्परिक लोक पर एक दिवसीय कार्यशाला, राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान, जनपथ, नई दिल्ली - 6 दिसंबर, 2019

संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा 6 दिसंबर, 2019 को 'म्यूजियम आउटरीच टू विलेज' के अंतर्गत 'सांझी:वृन्दावन की पारम्परिक लोक कला' विषय पर राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान, जनपथ, नई दिल्ली में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

इस कार्यशाला में जय जवान उच्च माध्यमिक विद्यालय, सिखेड़ा ग्राम, मेरठ के कुल 20 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। वृन्दावनस्थ सांझी परम्परा के संवर्धन हेतु छात्रों को जागरूक करना एवं पारम्परिक सांझी कलाकारों को यथोचित मंच प्रदान करना इस कार्यशाला का मुख्य ध्येय था। साथ ही लुप्त होती जा रही अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों के परिपेक्ष्य में सांझी कला के विषय में सूक्ष्मता से समझना एवं उसका प्रलेखीकरण भी इस कार्यशाला का मुख्य केंद्र था।

लगभग 500 वर्ष प्राचीन श्री राधारमण मंदिर से आये श्री सौरभ गोस्वामी जी ने वृन्दावन की पारम्परिक सांझी कला के विभिन्न पक्षों के बारे में बच्चो को जानकारी दी। साथ ही उनके मार्गदर्शन में बच्चो ने सांझी के ख़ाँके एवं विभिन्न कलाकृतियों के ख़ाँको से सांझी बनानी भी सीखी। उनके साथ सह कलाकार श्री मदन मोहन शर्मा जी एवं उनके सुपुत्र श्री चित्रांग गोस्वामी जी भी कार्यशाला में उपस्थित थे।

यह कार्यशाला संकायध्यक्षा एवं विभागाध्यक्षा प्रो (डॉ) मानवी सेठ तथा सहायक प्रो जूही सादिया द्वारा संकल्पित कार्यप्रणाली के अंतर्गत शोध सहायक सुशांत भारती, अंकन गुहा, हुमा खान, साक्षी कुकरेती, पलोमा भट्टाचार्जी एवं आनंद हरि द्वारा आयोजित की गई थी।

इस कार्यशाला के मुख्य अंग इस प्रकार थे:

    • बच्चो द्वारा विभिन्न गैलरियों का शैक्षणिक भ्रमण
    • संग्रहालय एवं पारम्परिक लोक कला विषय पर अनौपचारिक वक्तव्य
    • सांझी कलाकारों द्वारा सांझी पर वक्तव्य
    • सांझी कलाकारों द्वारा बच्चो को सांझी ख़ाँको का निर्माण
    • सांझी कलाकारों द्वारा बच्चो के समक्ष सांझी निर्माण
    • लघु चित्र कला गैलरी में बच्चो द्वारा शैक्षणिक गतिविधि
    • बच्चो द्वारा सांझी बनाना

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सितम्बर, 2019

गाँधी है सबके लिए कार्यशाला - राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर - 28 सितम्बर, 2019

संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा 28 सितम्बर, 2019 को गांधीजी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, जयपुर की कुल 40 छात्राओं ने भाग लिया। गांधीजी की समग्र विचारधारा, उनके निजी जीवन से जुड़े तथ्य एवं उनके जीवन चिंतन को रचनात्मक कार्यशाला द्वारा देश के सुदूर स्थानों तक पहुँचाना इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय है।

बच्चो को गांधीजी के आत्म निर्भरता, स्वछता, प्रेम ,समन्वय, सद्भावना एवं अहिंसा के सिद्धांतो के प्रति जागरूक किया गया। गांधीजी के निजी जीवन के विभिन्न पक्षों का बच्चो से साक्षात्कार कराया गया एवं उन्हें गांधीजी के जीवन मूल्यों के प्रति सजग कराया गया।

यह कार्यशाला संकायध्यक्षा एवं विभागाध्यक्षा प्रो (डॉ) मानवी सेठ द्वारा संकल्पित कार्यप्रणाली के अंतर्गत शोध सहायक हुमा खान, साक्षी कुकरेती, पलोमा भट्टाचार्जी, एवं सुशांत भारती द्वारा आयोजित की गई थी।

इस कार्यशाला के मुख्य अंग इस प्रकार थे:-

  • कथा वाचन
  • चित्र प्रदर्शनी
  • गांधीजी का पिटारा व हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस
  • गांधीजी की निजी वस्तुओं की प्रतिकृति के ऊपर रचनात्मक लेखन

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गाँधी है सबके लिए कार्यशाला - श्री स्वामीनारायण इंटरनेशनल स्कूल, नवसारी, गुजरात - 25 सितम्बर, 2019

संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा 25 सितम्बर, 2019 को गांधीजी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में श्री स्वामीनारायण इंटरनेशनल स्कूल, नवसारी, गुजरात में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कुल 40 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। गांधीजी की समग्र विचारधारा, उनके निजी जीवन से जुड़े तथ्य एवं उनके जीवन चिंतन को रचनात्मक कार्यशाला द्वारा देश के सुदूर स्थानों तक पहुँचाना इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय है।

स्वतंत्रता आंदोलन में अनूठा स्थान रखने वाले दांडी ग्राम के पास अवस्थित इस विद्यालय में गांधीजी द्वारा संकल्पित स्वदेशी की विचारधारा इस कार्यशाला का मुख्य आधार था। स्कूली शिक्षा,स्वच्छता एवं आत्म निर्भरता पर गांधीजी के विचार इस कार्यशाला के लिए अतिशय महत्वपूर्ण थे। बच्चो को गांधीजी एवं उनसे जुडी वस्तुओं के बारे में विशिष्ट कार्य पद्धति एवं संग्रहालय की महत्ता बताने हेतु यह कार्यशाला अत्यंत सहायक रही।

यह कार्यशाला संकायध्यक्षा एवं विभागाध्यक्षा प्रो (डॉ) मानवी सेठ द्वारा संकल्पित कार्यप्रणाली के अंतर्गत शोध सहायक सुशांत भारती, हुमा खान एवं साक्षी कुकरेती द्वारा आयोजित की गई थी।

इस कार्यशाला के मुख्य अंग इस प्रकार थे :-

1. कथा वाचन
2. चित्र प्रदर्शनी
3. गांधीजी का पिटारा व हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस
4. गोबर एवं मिट्टी द्वारा मूर्तिकला

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गाँधी है सबके लिए कार्यशाला - इस्कॉन नीलाचल वैदिक ग्राम, तलासरी, महाराष्ट्र - 24 सितम्बर, 2019

संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा 24 सितम्बर, 2019 को गांधीजी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में इस्कॉन नीलाचल वैदिक ग्राम में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कुल 40 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। गांधीजी की समग्र विचारधारा, उनके निजी जीवन से जुड़े तथ्य एवं उनके जीवन चिंतन को रचनात्मक कार्यशाला द्वारा देश के सुदूर स्थानों तक पहुँचाना इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय है।

तलासरी महाराष्ट्र स्थित नीलाचल वैदिक ग्राम गांधीजी के फीनिक्स एवं वर्धा आश्रम की विचारधारा से मेल खाता हुआ एक आत्मनिर्भर ग्राम है। गांधीजी द्वारा प्रतिपादित आत्मनिर्भर एवं सतत ग्राम प्रणाली की संकल्पित विचारधारा इस कार्यशाला का मुख्य आधार था। स्कूली शिक्षा,स्वच्छता एवं आत्म निर्भरता पर गांधीजी के विचार इस कार्यशाला के लिए अतिशय महत्वपूर्ण थे। ग्राम्य परिपाटी से आये हुए इन बच्चो को गांधीजी एवं उनसे जुडी वस्तुओं के बारे में विशिष्ट कार्य पद्धति एवं संग्रहालय की महत्ता बताने हेतु यह कार्यशाला अत्यंत सहायक रही।

यह कार्यशाला संकायध्यक्षा एवं विभागाध्यक्षा प्रो (डॉ) मानवी सेठ द्वारा संकल्पित कार्यप्रणाली के अंतर्गत शोध सहायक सुशांत भारती, हुमा खान एवं साक्षी कुकरेती द्वारा आयोजित की गई थी।

इस कार्यशाला के मुख्य अंग इस प्रकार थे :-

1. कथा वाचन
2. चित्र प्रदर्शनी
3. गांधीजी का पिटारा व हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस
4. "गांधीजी व उनके सपने का गांव" विषय पर वर्ली चित्रकला 

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गाँधी है सबके लिए कार्यशाला - तेजपुर विश्वविद्यालय, तेजपुर, असम - 23 सितम्बर, 2019

संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा 23 सितम्बर, 2019 को गांधीजी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में तेज़पुर विश्वविद्यालय, तेजपुर, असम में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में राजकीय कन्या उच्च विद्यालय तथा केंद्रीय विद्यालय, तेजपुर के कुल 40 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। गांधीजी की समग्र विचारधारा, उनके निजी जीवन से जुड़े तथ्य एवं उनके जीवन चिंतन को रचनात्मक कार्यशाला द्वारा देश के सुदूर स्थानों तक पहुँचाना इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय है।

असम प्राकृतिक सम्पदा से ओत प्रोत भारतीय भूभाग के उत्तर पूर्वी दिशा में अवस्थित एक सुन्दर प्रदेश है तथा इस प्रदेश में समय समय पर प्राकर्तिक आपदाएं जनजीवन को अस्त व्यस्त करती रहती है। कालांतर में मानवीय हस्तक्षेप ने इस भूभाग के वनस्पति सम्पदा एवं जीवो को अत्यंत क्षति पहुंचाई है। अतः गांधीजी के परिस्तिथिकी के प्रति उनके विचार इस कार्यशाला का आधार स्तम्भ था। सामाजिक समन्वय एवं अनियन्त्रिक औद्योगीकरण के प्रति गांधीजी का जीवन चिंतन बच्चो के लिए इस रचनात्मक कार्यशाला के लिए अत्यंत लाभप्रद था।

यह कार्यशाला संकायध्यक्षा एवं विभागाध्यक्षा प्रो (डॉ) मानवी सेठ द्वारा संकल्पित कार्यप्रणाली के अंतर्गत शोध सहायक पलोमा भट्टाचार्जी, आनंद हरि एवं अंकन गुहा द्वारा आयोजित की गई थी।

इस कार्यशाला के मुख्य अंग इस प्रकार थे :-

  1. कथा वाचन
  2. चित्र प्रदर्शनी
  3. गांधीजी का पिटारा व हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस
  4. प्राकृतिक अपशिष्ट द्वारा ईको-बास्केट का निर्माण
  5. लघु नाटक मंचन

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गाँधी है सबके लिए कार्यशाला - मदरसा तालीम उल कुरान, सीमापुरी, नई दिल्ली - 19 सितम्बर, 2019

संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा 19 सितम्बर, 2019 को गांधीजी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में मदरसा तालीम उल कुरान, सीमापुरी में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मदरसे के कुल 40 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। गांधीजी की विचारधारा एवं उनके चिंतन को रचनात्मक कार्यशाला द्वारा देश के सुदूर स्थानों तक पहुँचाना इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय है।

स्कूली शिक्षा,स्वच्छता एवं आत्म निर्भरता पर गांधीजी के विचार इस कार्यशाला के आधार स्तम्भ थे। समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से आये हुए इन बच्चो को गांधीजी एवं उनसे जुडी वस्तुओं के बारे में विशिष्ट कार्य पद्धति एवं संग्रहालय की महत्ता बताने हेतु यह कार्यशाला अत्यंत सहायक रही।

यह कार्यशाला संकायध्यक्षा एवं विभागाध्यक्षा प्रो (डॉ) मानवी सेठ द्वारा संकल्पित कार्यप्रणाली के अंतर्गत शोध सहायक सुशांत भारती, हुमा खान, आनंद हरि एवं साक्षी कुकरेती द्वारा आयोजित की गई।

इस कार्यशाला के मुख्य अंग इस प्रकार थे:

1. कथा वाचन
2. चित्र प्रदर्शनी
3. गांधीजी का पिटारा व हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस
4. गांधीजी के जीवन पर कोलाज

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गाँधी है सबके लिए कार्यशाला - प्रेम महाविद्यालय, केशी घाट, वृन्दावन - 12 सितम्बर, 2019

संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा 12 सितम्बर, 2019 को गांधीजी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में प्रेम महाविद्यालय, केशी घाट, वृन्दावन में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में छठी कक्षा के कुल 30 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। गांधीजी की विचारधारा एवं उनके चिंतन को रचनात्मक कार्यशाला द्वारा देश के सुदूर स्थानों तक पहुँचाना इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय है। 

वृन्दावन स्थित प्रेम महाविद्यालय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक अनुपम स्थान रखता है। यह विद्यालय हाथरस के राजा श्री महेन्द्र प्रताप द्वारा वर्ष 1909 में साउथ अफ्रीका में चल रहे गांधीजी के प्रेम एवं अहिंसा के सिद्धांत से प्रभावित होकर स्थापित किया गया था। राजा महेंद्र प्रताप स्वयं गांधीजी के स्वतंत्रता आंदोलन में सहभागी होने विदेश गए थे व अपने समय के प्रखर गाँधीवादी भी थे। विद्यालय की आधारशिला स्वयं महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी द्वारा रखी गई थी। वर्ष 1915 में गांधीजी जब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना पूर्ण योगदान देने हेतु भारत आये तब 14 अप्रैल,1915 को गांधीजी का प्रथम पदार्पण इस विद्यालय परिसर में हुआ। इसके उपरांत अल्प समय लिए वह कई इस विद्यालय में आते रहे। गांधीजी के समकालीन पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरोजिनी नायडू, सुभाष चंद्र बोस, पंडित मालवीय जी इत्यादि जैसे स्वतंत्रता सैनानी भी इस विद्यालय में आये। 

इतने बृहद एवं संपन्न इतिहास से युक्त प्रेम महाविद्यालय परिसर में 'गाँधी है सबके लिए' श्रृंखला की दसवीं कार्यशाला का आयोजन किया गया। गांधीजी ने सन 1915 में अपनी यात्रा के दौरान डायरी में वृन्दावन में दिखी गंदगी के बारे में लिखा था। अतः पर्यावरण स्वच्छता तथा जल प्रदूषण 
इस कार्यशाला के आधार स्तम्भ थे। साथ ही गांधीजी का प्रेम महाविद्यालय से जुड़ाव तथा प्रेम महाविद्यालय का ऐतिहासिक महत्त्व इस कार्यशाला की कार्यप्रणाली हेतु अत्यंत सहायक रहे। 

यह कार्यशाला संकायध्यक्षा एवं विभागाध्यक्षा प्रो (डॉ) मानवी सेठ द्वारा संकल्पित कार्यप्रणाली के अंतर्गत शोध सहायक सुशांत भारती, हुमा खान एवं आनंद हरि द्वारा आयोजित की गई। 

सर्वप्रथम कार्यशाला के प्रारम्भ में बच्चो को 'गाँधी है सबके लिए' कार्यशाला श्रृंखला का परिचय दिया गया व उन्हें इस कार्यशाला का उद्देश्य बताया गया। साथ ही बच्चो को प्रेम महाविद्यालय से जुड़ा इतिहास बताया गया।   की गांधीजी से यह स्थान कितनी जुडी हुई है व् उनके इलावा और कौन-कौन से स्वतंत्रता सैनानी विद्यालय में आये थे।

इसके बाद कार्यशाला का प्रारम्भ कथा वाचन सत्र द्वारा किया गया जिसमे गांधीजी के जीवन से जुडी तीन कथाओं का रचनात्मक शैली द्वारा बच्चो के समक्ष शोध सहायको द्वारा वाचन किया गया। गांधीजी के सत्य,अहिंसा, शांति एवं आत्म निर्भरता जैसे विचार इन कहानियों के माध्यम से बच्चो को बताए गए। साथ ही गांधीजी के पर्यावरण स्वच्छता को लेकर भी बच्चो को कहानियों के माध्यम से बताया गया। कथा वाचन सत्र में बच्चो की सहभागिता को बढ़ाने के लिए बीच बीच में उनसे गांधीजी के जीवन सम्बन्धी प्रश्न भी किये गए। 

इसके बाद बच्चो को एक लघु चित्र प्रदर्शनी दिखाई गई जिसमे गांधीजी की सम्पूर्ण जीवन यात्रा को चित्रों के द्वारा बच्चो को दिखाया गया। इसके अंतर्गत गाँधी जी के सम्पूर्ण जीवन वांग्मय को चित्र प्रदर्शनी द्वारा बच्चो को दिखाकर समझाया गया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रेम महाविद्यालय के योगदान तथा भारतीय जनमानस को प्रभावित करने में गांधीजी द्वारा किये गए विभिन्न आंदोलनों के प्रति बच्चो को जागरूक किया गया। 

चित्र प्रदर्शनी के पश्चात बच्चो को गांधीजी का पिटारा दिखाया गया। संग्रहालय विभाग द्वारा रचनात्मक रूप से तैयार किया गया यह पिटारा इस सम्पूर्ण कार्यशाला का मुख्य अंग है जिसमे गांधीजी के निजी जीवन से जुडी वस्तुओं के प्रतिरूप जैसे घड़ी, चप्पल, खड़ाऊ, चश्मा इत्यादि रखे हुए है। इन प्रतिरूपो के माध्यम से बच्चो को गांधीजी के निजी जीवन शैली के बारे में बताया गया तथा बच्चो को उन्हें अपने निजी जीवन में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बाद में इन प्रतिरूपो को बच्चो को हाथ से छूने का भी अवसर दिया गया जिसमे बच्चो ने अत्यंत उत्साह के साथ बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 

पूर्व में बच्चो को गांधीजी पर्यावरण प्रेम के अनुभव को आगे बढ़ाते हुए बच्चो के दो समूह बनाये गए जिसमे उनको 'स्वच्छ वृन्दावन' विषय पर चित्रकला करने हो कहा गया। इस रचनात्मक गतिविधि में बच्चो ने पूरे हर्ष के साथ अपनी प्रतिभागिता दी। बच्चो ने अपनी कल्पना से सुन्दर चित्रकारी करी।

इसके उपरांत जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री कृष्णपाल सिंह, उप शिक्षा अधिकारी श्री रनवीर सिंह, श्री पुष्पांग गोस्वामी जी, आचार्य नरेश नारायण शर्मा जी तथा प्रेम महाविद्यालय के प्रधानाचार्य श्री देव प्रकाश शर्मा जी द्वारा बच्चो को प्रमाण पत्र एवं उपहार दिए गए तथा समूह चित्र के साथ कार्यशाला का समापन किया गया।

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अगस्त, 2019

गाँधी है सबके लिए कार्यशाला - जवाहर नवोदय विद्यालय, डबरा, ग्वालियर - 16 अगस्त, 2019

संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा 16 अगस्त, 2019 को गांधीजी के 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में जवाहर नवोदय विद्यालय, डबरा, ग्वालियर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यशाला में छठी कक्षा के 41 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। गांधीजी की विचारधारा एवं उनके चिंतन को रचनात्मक कार्यशाला द्वारा देश के सुदूर स्थानों तक पहुँचाना इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय है।

जवाहर नवोदय विद्यायल मानव संसाधन विकास मंत्रालय,भारत सरकार अंतर्गत एक विशिष्ट शैक्षणिक इकाई है जिसके द्वारा गॉंवो से प्रतिभाशाली बच्चो को चयनित कर निःशुल्क एवं उच्च स्तरीय स्कूली शिक्षा दी जाती है। 'गाँधी है सबके लिए' एक ऐक्शन रिसर्च प्रोजेक्ट है जिसके अंतर्गत संग्रहालय विज्ञान विभाग आवश्यकता अनुसार यथोचित साधन प्रयोग करते हुए समाज के ऐसे वर्गों पर शोध कर रहा है जहां संग्रहालय नहीं है अथवा संग्रहालय की सेवा उन तक नहीं पहुंच पाती। इस कार्यशाला का उद्देश्य गांधीजी के विचारो, सिद्धांतो एवं जीवन शैली के बारे में संग्रहालय में रखी गांधीजी के वस्तुओं के प्रतिरूपो, कथा वाचन, चित्र प्रदर्शनी एवं अन्य रचनात्मक क्रियाओं द्वारा गांधीजी की सांस्कृतिक विरासत को उन लोगो तक पहुँचाना जो संग्रहालय आने में असमर्थ है या संग्रहालय की सेवा उन तक नहीं पहुँच पा रही है। साथ ही अनौपचारिक शिक्षा पद्धति द्वारा किस प्रकार बच्चो को विभिन्न विषयो के प्रति जागरूक किया जा सकता है इस सन्दर्भ में स्थानीय शिक्षकों का परिचय करवाना भी इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था।

स्कूली शिक्षा,ग्राम स्वराज्य-विकास एवं आत्म निर्भरता पर गांधीजी के विचार इस कार्यशाला के आधार स्तम्भ थे। साथ ही गांधीजी का भाषा चिंतन एवं देशज लोक परम्पराओं के प्रति उनकी प्रगाढ़ रूचि इस कार्यशाला की कार्यप्रणाली हेतु अत्यंत सहायक रहे। ग्राम्य परिपाटी से आये हुए इन बच्चो के लिए विशिष्ट कार्य पद्धति एवं संग्रहालय की महत्ता बताने हेतु यह कार्यशाला अत्यंत सहायक रही।

यह कार्यशाला सहायक प्रोफेसर सुश्री जूही सादिया तथा तीन शोध सहायक क्रमशः हुमा खान, आनंद हरि एवं सुशांत भारती द्वारा आयोजित की गई।

सर्वप्रथम कार्यशाला के प्रारम्भ में सहायक प्रोफेसर सुश्री जूही सादिया द्वारा बच्चो को 'गाँधी है सबके लिए' कार्यशाला श्रृंखला का परिचय दिया गया व उन्हें इस कार्यशाला का उद्देश्य बताया गया।  ततपश्चात कार्यशाला क प्रारम्भ कथा वाचन सत्र द्वारा किया गया जिसमे गांधीजी के जीवन से जुडी चार कथाओं का रचनात्मक शैली द्वारा बच्चो के समक्ष शोध सहायको द्वारा वाचन किया गया। गांधीजी के सत्य, अहिंसा, शांति एवं आत्म निर्भरता जैसे विचार इन कहानियों के माध्यम से बच्चो को बताए गए। कथा वाचन सत्र में बच्चो की सहभागिता को बढ़ाने के लिए बीच बीच में उनसे गांधीजी के जीवन सम्बन्धी प्रश्न भी किये गए।

इसके बाद बच्चो को एक लघु चित्र प्रदर्शनी दिखाई गई जिसमे गांधीजी की सम्पूर्ण जीवन यात्रा को चित्रों के द्वारा बच्चो को दिखाया गया। इसके अंतर्गत गाँधी जी के सम्पूर्ण जीवन वांग्मय को चित्र प्रदर्शनी द्वारा बच्चो को दिखाकर समझाया गया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गांधीजी के योगदान तथा भारतीय जनमानस को प्रभावित करने में गांधीजी द्वारा किये गए विभिन्न आंदोलनों के प्रति बच्चो को जागरूक किया गया।

चित्र प्रदर्शनी के पश्चात बच्चो को गांधीजी का पिटारा दिखाया गया। संग्रहालय विभाग द्वारा रचनात्मक रूप से तैयार किया गया यह पिटारा इस सम्पूर्ण कार्यशाला का मुख्य अंग है जिसमे गांधीजी के निजी जीवन से जुडी वस्तुओं के प्रतिरूप जैसे घड़ी, चप्पल, खड़ाऊ, चश्मा इत्यादि रखे हुए है। इन प्रतिरूपो के माध्यम से बच्चो को गांधीजी के निजी जीवन शैली के बारे में बताया गया तथा बच्चो को उन्हें अपने निजी जीवन में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बाद में इन प्रतिरूपो को बच्चो को हाथ से छूने का भी अवसर दिया गया जिसमे बच्चो ने अत्यंत उत्साह के साथ बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

इसके पश्चात पिटारे के रोचक अनुभव को आगे बढ़ाते हुए बच्चो के दो समूह बनाये गए जिसमे उनके मध्य पिटारे में रखे हुए प्रतिरूपो को रखा गया। बच्चो को कहा गया की वह अपने आप को गांधीजी की किसी एक वस्तु के रूप में कल्पना कर गद्य या पद्य रूप में कुछ पंक्तियाँ लिखे। इस रचनात्मक गतिविधि में बच्चो ने पूरे हर्ष के साथ अपनी प्रतिभागिता दी। बच्चो ने अपने आप को गांधीजी के घड़ी, चप्पल, पुस्तक इत्यादि के रूप में कल्पित कर रचनात्मक लेखन किया। तत्पश्चात सभी बच्चो को उनके द्वारा लिखे हुए लेखो को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बच्चो ने अत्यंत उत्साह के साथ इसमें भी भाग लिया।

इन सब रचनात्मक गतिविधियों के बाद बच्चो को लोक भाषा से जुड़ा एक छोटा एवं रचनात्मक कार्य करवाया गया। गांधीजी सदैव ही ग्राम जीवन व लोक परम्परा के प्रगति एवं संवर्धन के पक्षधर रहे तथा उसी प्रेरणा के अंतर्गत बच्चो से स्थानीय लोक भाषा से जुड़े देशज शब्दों को लिखने के लिए कहा गया जो वह अपने अमूक अमूक स्थानों पर प्रयोग में लाते है। बच्चो ने अति उत्साह के साथ सामान्य जीवन में प्रयुक्त होने वाले अनेकानेक शब्द लिखे। गांधीजी के गाँवो के प्रति प्रेम तथा लोक भाषा के प्रति उनकी भावना इन बच्चो में रोपित हो सके इसलिए यह क्रिया उनसे करवाई गई।

कार्यशाला के अंत में बच्चो द्वारा गांधीजी के जीवन से जुडी एक काल रेखा बनाई जिसमे गांधीजी के जीवन के मुख्य घटनाओं को बच्चो द्वारा चिन्हित कराया गया। गांधीजी के जीवन के मुख्य घटनाक्रमों से बच्चो को अवगत कराना इस गतिविधि का मुख्य लक्ष्य था। इसके उपरांत कार्यशाला के प्रतिभागी बच्चो को विद्यालय की प्रधानाचार्या एवं सहायक प्रोफ़ेसर जूही सादिया द्वारा प्रमाण पत्र एवं उपहार दिए गए तथा समूह चित्र के साथ कार्यशाला का समापन किया गया।

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